Dr. K. C. Mehta

                       Dr. K. C. Mehta) (1892-1950)

डॉ० के० सी० मेहता का जन्म अमृतसर में सन् 1892 में हुआ। वे पादप रोग-विज्ञान (Plant Pathology) केविशेषज्ञ थे। भारत में गेहूँ के काले किट्ट (Black rust of Wheal ) के बार-बार मैदानों में फैलने सम्बन्धी खोजों के लिए वे प्रसिद्ध हैं।
      उन्होंने लाहौर से सन् 1914 में M.Sc. की उपाधि प्राप्त की। सन् 1915 में वे आगरा कॉलेज, आगरा में वनस्पति-विज्ञान में सहायक प्रोफेसर नियुक्त हुए। सन् 1920 में वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गए, जहाँ उन्होंने अनाजों के काले किट्ट (Black rust of Cereals) से सम्बन्धित खोज की। सन् 1922 में उन्होंने वहाँ से Ph.D. की उपाधि प्राप्त की।
सन् 1923 में वे आगरा कॉलेज के वनस्पति-विज्ञान विभाग में प्रोफेसर बने तथा काफी समय तक इस कॉलेज के प्रिंसिपलरहे। 

        सन् 1941 में उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से ही D.Sc. की उपाधि प्राप्त की। भारत में गेहूँ के काले किट्ट(Black rust of Wheat) सम्बन्धी खोजों के आधार पर उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि किट्ट के संक्रमण के केन्द्र उत्तरभारत में हिमालय पर्वत व दक्षिण में नीलगिरी एवं पुलने पहाड़ियों से बारबेरी पौधों से आने वाले यूरेडोस्पोर हैं।


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